In the psychologist’s office. Man and woman talking

सिर्फ इमोशनल लोगों को होती हैं ये 6 परेशानियां, जानें बचाव का तरीका

हमारा ब्रेन अपने आपमें एक बहुत बड़ी मिस्ट्री है। इसमें हमारे इमोशंस, हमारा थॉट प्रॉसेस और बहुत सारी ऐसी एनर्जी है, जिसके बारे में हमें ठीक से सब कुछ पता भी नहीं है। हमारी पूरी बॉडी ब्रेन से मिलनेवाले इंस्ट्रक्शंस को फॉलो करती है… इसी में तो सारा ट्विस्ट है!

क्या आपको छोटी-छोटी बातें भी बहुत अधिक बुरी लग जाती हैं? या आपकी फैमिली में कोई ऐसा मेंबर हो जिसे कुछ भी कहने से पहले आप कई बार सिर्फ इसलिए सोचते हैं कि उसे बुरा ना लग जाए? या कोई ऐसा दोस्त जिसे आपका कोई छोटा-सा मजाक भी तकलीफ दे देता हो? दरअसल ये सभी निशानियां है बहुत अधिक संवेदनशील होने की…

कोई इंसान सेंसेटिव क्यों है?

आमतौर पर कोई व्यक्ति दो कारणों से बहुत अधिक सेंसेटिव होता है। इसमें पहला कारण होता है उसके जीन। यानी वह जन्म से ही बहुत अधिक संवेदनशील है और प्रकृति ने ही उसे ऐसा बनाया है। दूसरा कारण होता है व्यक्ति के जीवन में घटित होनेवाली परिस्थितियां।

इस तरह बनती है पर्सनैलिटी

कुछ गुण हम जीन के साथ कैरी करते हैं और कुछ विशेषताएं हमारे अंदर वक्त और परिस्थितियों के साथ आती हैं। ये दोनों चीजें मिलकर ही हमारा व्यवहार और सोच निर्धारित करती हैं। इन्हीं से कोई व्यक्ति बहुत गुस्सैल या बहुत इमोशनल बनता है। इमोशन हम सभी में होते हैं लेकिन कुछ लोग दूसरों की बातों को लेकर बहुत अधिक सेंसेटिव होते हैं।

छोटी-छोटी बातों की कसक

जो लग बहुत अधिक संवेदनशील होते हैं उनके अंदर किसी भी व्यक्ति द्वारा कही गई एक ही बात को लेकर लगातार थॉट प्रॉसेस चलता रहता है। ये किसी भी बात या स्थिति को लेकर बहुत अधिक सोचते हैं और हर समय विचारों में घिरे रहने के कारण एंग्जाइटी का शिकार हो जाते हैं। इनकी पर्सनल लाइफ,फैमिली लाइफ, प्रफेशनल लाइफ, इंटरपर्सनल लाइफ डिस्टर्ब रहने लगती है।

सलूशन नहीं निकाल पाते

जो लोग बहुत अधिक इमोशनल होते हैं, उन्हें आमतौर पर किसी भी बात का समाधान निकालने या सलूशन तक पहुंचने में बहुत अधिक दिक्कत होती है। इस कारण वे लगातार तनाव का शिकार रहते हैं। इसकी वजह होती है कि ये किसी भी बात को मैक्सिमाइज यानी बहुत बड़ा करके सोचते हैं। और ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ये इमोशनल इश्यूज के साथ डील नहीं कर पाते हैं।

अजस्टमेंट डिसऑर्डर

जो लोग बहुत अधिक इमोशनल होते हैं, उनके साथ यह दिक्कत हो जाती है कि वे हर समस्या को बहुत बड़ा करके देखते हैं। जबकि ठीक इसके विपरीत इन्हें दिए जानेवाले सलूशन को ये बहुत छोटा करके आंकते हैं। इस कारण हर समय दबाव में रहते हैं। कई बार कुंठा का शिकार हो जाते हैं और इन्हें कहीं भी यानी घर, परिवार, ऑफिस और दोस्तों के बीच अजेस्ट करने में दिक्कत होती है।

नींद ना आने की समस्या

अतिसंवेदनशील लोगों में ‘चेन ऑफ थॉट्स’ यानी लगातार आते विचारों के कारण नींद ना आने की समस्या अधिक देखने को मिलती है। सायकाइट्री में इसे एक लक्षण के तौर पर देखा जाता है, जिसे स्लीप डिस्टर्बेंसेज कहते हैं। अधिक इमोशनल लोग हर समय किसी एक ही घटना या बात को लेकर सोचते रहते हैं और इस कारण इनका दिमाग परेशान रहता है और इन्हें नींद आने में दिक्कत का सामना करना पड़ता है।

रिजेक्शन का डर

अधिक संवेदनशील लोगों में अपने प्यार का इजहार करने को लेकर बहुत अधिक असमंजस रहता है। इन्हें रिजेक्शन का डर अधिक सताता है। ये सोचते रहते हैं कि अगर सामनेवाले ने मना कर दिया तो इनका सामान्य रिश्ता भी खराब हो जाएगा। ऐसा सोचकर ये खुद को अपने आपमें समेट लेते हैं और क्षमता से अधिक काम करने लगते हैं। इस कारण इनकी स्थिति कई बार अधिक खराब हो जाती है।

अकेलापन होने लगता है हावी

बहुत अधिक संवेदनशीलता के कारण एंग्जाइटी की चपेट में आए लोग अक्सर अपने आस-पास के उन लोगों से बात करना बंद कर देते हैं, जिनकी बात इन्हें बहुत अधिक बुरी लगी होती है। फिर चाहे ऑफिस हो या घर। धीरे-धीरे करके ये सभी से दूरी बनाने लगते हैं। इससे इनके अंदर अकेलेपन की भावना बढ़ने लगती है।

एंग्जाइटी का शिकार

किसी भी सिचुएशन को पूरी तरह समझे बिना और किसी भी बात को पूरी तरह सुने बिना, ये लोग तुरंत निष्कर्ष पर पहुंच जाते हैं। इस कारण ये लोग बहुत अधिक चिंतित हो जाते हैं। इनके पास पुरानी बातें परसिस्ट करती रहती हैं। यानी इनके ये बीती बातों को पकड़कर बैठे रहते हैं। इससे इनमें एंग्जाइटी क्रिएट होती है और ये अक्सर लो फील करने लगते हैं।

डिप्रेशन के बढ़ जाते हैं चांस

दोस्तों और परिवार में बात बंद करने से इमोशनल लोगों में चिड़चिड़ापन बढ़ने लगता है और धीरे-धीरे ये डिप्रेशन की तरफ जानें लगते हैं। इन्हें आमतौर पर ऐसी समस्या इसलिए होती है क्योंकि ये दूसरे लोगों की बातों को बहुत गंभीरता से लेते हैं और अपनी बातें एक्सप्रेस नहीं कर पाते।

सेक्शुअल डिस्टर्बेंसेज

बात अगर सेक्शुअल डिस्टर्बेंस की हो तो यह केवल मैरिटल रिलेशनशिप में नहीं होती बल्कि सिंगल यंगस्टर्स में भी हो सकती है। क्योंकि आमतौर पर जो लोग अधिक संवेदनशील होते हैं, उनमें शर्म और झिझक भी बहुत अधिक होती है। इस कारण अपने मन की बात जल्दी से किसी को बता नहीं पाते हैं।