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Happy smiling couple in love hug and kiss each other in the amusement park. Sunny warm spring evening

How divorce affects mental state of children, how you deal with it?

डिवॉर्स का बच्चे की मेंटल हेल्थ पर होता है ऐसा असर, उम्र के हिसाब से करें डील

डिवॉर्स केवल दो लोगों से जुड़ा मामला नहीं होता, इसमें दो परिवार अलग हो रहे होते हैं। स्थिति और अधिक भावनात्मक पीड़ा देनेवाली हो जाती है अगर कपल के पास बच्चा भी हो। ऐसे में दोनों की ही प्रायॉरिटी बच्चे का भविष्य उसकी भावनात्मक सुरक्षा और आनेवाले बदलावों के लिए उसे मानसिक तौर पर तैयार करना होनी चाहिए।पैरंट्स के बीच डिवॉर्स का बच्चे की मानसिक हालत पर क्या असर पड़ेगा यह उस बच्चे की उम्र पर अधिक निर्भर करता है। ऐसे में अलग हो रहे माता-पिता को इस बात को डील करना आना चाहिए कि वे अपने बच्चे को अपने सेपरेशन के बारे में किस तरह बताएं ताकि बच्चा मानसिक तौर पर प्रताड़ित महसूस ना करे और उसे भविष्य में किसी तरह के डिसऑर्डर या मानसिक तनाव का सामना ना करना पड़े…

ये हैं रेड फ्लेग्स बच्चे के व्यवहार में कुछ ऐसे परिवर्तन आते हैं जिन्हें आप समझ सकते हैं कि आपके अलगाव का बच्चे के मन पर क्या असर पड़ रहा है। जैसे…

-एकाग्रता में कमी
-पढ़ाई में मन ना लगना और लगातार रिजल्ट खराब होना
-लगातार चिड़चिड़ा रहना
-हम उम्र बच्चों के साथ बढ़ते झगड़े
-जिद्दी हो जाना
-पैरंट्स की बात को अनसुना करना
-हर छोटी-बड़ी बात पर गुस्सा दिखाना
-प्रियजनों से दूरी बनाना
-मनपसंद कामों से दूरी बना लेना
-खुद को चोट पहुंचाना- इसमें कलाई काटना, थाई पर कट लगाना या पेट पर कट लगाना मुख्य रूप से शामिल हैं।
-नींद ना आना या नींद बहुत आना
-खाने में रुचि में ना लेना या अत्यधिक खाना
-ड्रग्स और एल्कोहल की लत लगता

डिवॉर्स के दौरान ऐसे करें बच्चे की मदद

 

आप अपनी टॉप प्रायॉरिटी में बच्चे की जरूरतों और उसके इमोशंस को रखें। ताकि बच्चा जिस दर्द से गुजर रहा है, उसे बढ़ने से रोका जा सके।
क्योंकि बच्चे के लिए डिवॉर्स बहुत कंफ्यूजिंग होता होता है। वह सोच नहीं पाता कि इसके बाद उसके साथ क्या होगा, उसे वैल्यू मिलेगी या नहीं, कोई उस पर ध्यान देगा या नहीं। या अपने मम्मी और पापा के बिना वह कैसे रहेगा। यह अनिश्चितता उसे परेशान करती है। कई बार बच्चे को लगता है कि इस सबकी वजह वह खुद तो नहीं है। ऐसे में वह खुद को ब्लेम करते हैं और गिल्ट से भर जाते हैं।

बच्चे की जरूरतों का ध्यान रखें

सबसे पहले तो इस बात पर ध्यान दें कि बच्चा क्या चाहता है। क्योंकि उसे आप लोगों की लड़ाई से कोई मतलब नहीं है, उसे अपनी सिक्यॉरिटी और आप दोनों का ही प्यार चाहिए होता है। ऐसे में आप उसे अहसास कराएं कि अलग होकर भी उसके प्रति आपका प्यार कम नहीं होगा।

बच्चे को गिल्ट फील ना कराएं

आप अपने पार्टनर के साथ डायरेक्ट कम्यूनिकेशन करें। बच्चे के साथ इस तरह बात ना करें कि तुम्हारे पापा ऐसे हैं या तुम्हारी मम्मी ऐसी हैं…। इससे बच्चा खुद को दोषी मानने लगता है। इसलिए जरूरी है कि दोनों साथ में बैठकर बच्चे को डिवॉर्स के बारे में बताएं। इस दौरान अपने पार्टनर के प्रति सम्मानजनक भाषा का उपयोग करें।

बच्चों के सामने अपशब्द ना बोलें

-बच्चे की उम्र के अनुसार प्रॉपर और सही तरीके से उसे डिवॉर्स की वजह बताएं। उसके बार-बार पूछने पर हर बार एक ही वजह बताएं और मम्मी-पापा दोनों एक ही रीजन दें ताकि बच्चा यकीन कर पाएं। साथ ही उनके साथ रहने और ना रहने के फायदे और नुकसान बताएं।

-बच्चे को बताएं कि हम दोनों ही आपको प्यार करते हैं लेकिन हम दोनों के बीच दिक्कतों के चलते साथ रहना संभव नहीं है। हम दोनों ही हमेशा आपसे मिलते रहेंगे। साथ ही बच्चे को यह भी बताएं कि आनेवाले समय में क्या-क्या बदलाव होनेवाले हैं।

डिवॉर्स के दौरान क्या करें

-अपने एक्स पार्टनर के साथ हमेशा सम्मानजनक रिश्ता करें। ताकि बच्चे को पूरा वक्त दे सकें।

– अपने पार्टनर के साथ हमेशा ब्राइट साइड पर देखें ताकि बच्चा सुरक्षित और खुश महसूस करे।

– बच्चे के प्रति अपनी जिम्मेदारियां बांट लें। ताकि उसे आप दोनों का पूरा प्यार और समय मिलता रहे।

बच्चे को यकीन दिलाएं कि आप दोनों का प्यार उसे मिलता रहेगा

डिवॉर्स के बाद क्या करें

-बच्चे की भावनाओं को समझें, उससे बात करें।
-उनको इमादार बनाएं और अपनी भावनाएं शेयर करना सिखाएं। क्योंकि टफ टाइम में दोनों को मिलकर ही काम करना है।
-बच्चों को बताएं इस अलगाव में तुम्हारा कोई रोल नहीं है। क्योंकि बच्चा काफी लंबे समय तक खुद को दोषी मानता रहता है।
-दूसरे पार्टनर के साथ मिलने और घूमने का वक्त दें। परिवार के अन्य सदस्यों से मिलाते रहें।
– आउटिंग पर ले जाएं। रिश्तेदारों के घर लेकर जाएं। अपनी सेहत का जरूर ध्यान रखें क्योंकि आपके बीमार पड़ते ही बच्चा खुद को कमजोर और असहाय महसूस करने लगेगा।
-अगर आपको बच्चे के व्यवहार में कोई बदलाव लगे या आप चाहकर भी उसे खुश रखने में सफल ना पाएं तो सायकाइट्रिस्ट और साइकॉलजिस्ट की मदद लें।

एक्सपर्ट: यह आर्टिकल सायकॉलजिस्ट संस्कृति शर्मासे बातचीत पर आधारित है। ये फिलहाल उद्मग मेंटल हेल्थ केयर, कड़कड़डूमा दिल्ली में अपनी सेवाएं दे रही हैं। ये फैमिली काउंसलिंग, मैरिटल थेरपी, कपल काउंसलिंग एक्सपर्ट हैं और पिछले 10 साल से इस क्षेत्र में कार्यरत हैं। आप इनसे मिलने के लिए फोन नंबर- 011-40527617 पर अपॉइंटमेंट ले सकते हैं।
 
About udgam

UDGAM is amongst Delhi's leading providers of Advanced Child and Adolescents Mental Health and Well-Being Services. UDGAM is founded by a group of mental health professionals who believe that the right interventions at the right time for persons with difficulties related to mental health, emotional management, and behavioral problems can bring impactful changes in their life. Our objective is to provide quality care, support, intervention, and multidisciplinary services for the various psychological, and behavioral issues, that a person experiences.