बाथरूम और टॉयलेट में बहुत वक्त लगता है? हो सकते हैं इस बीमारी के लक्षण

बाथरूम में जाते हैं नहाकर या फ्रेश होकर बाहर आते हैं और फैमिली के दूसरे लोग आप पर नाराज होने लगते हैं कि आप बाथरूम में बहुत वक्त लगाते हो… जबकि आपको लगता है कि आप तो तुरंत ही आ गए…

हममे से कई लोगों को बाथरूप में ज्यादा देर तक रहने के कारण घरवालों की डांट सुननी पड़ती है। कई बार हम इस डांट से इरिटेट भी हो जाते हैं क्योंकि हमें लगता है कि हम देर नहीं लगाते और तुरंत नहाकर या फ्रेश होकर बाहर आ जाते हैं…अगर आपके साथ भी ऐसा होता है कि आप फ्रेश होने में ज्यादा टाइम लगाने की वजह से डांट सुनते हैं या भाई-बहन और दोस्तों की हंसी का कारण बनते हैं तो आपको अपने बारे में बहुत कुछ जानने की जरूरत है…
क्यों लगता है बाथरूम में अधिक वक्त?
जो लोग बाथरूम में बहुत अधिक वक्त लगाते हैं और उन्हें इस बात का अहसास भी नहीं होता तो इसका मतलब है कि उन्हें सायकॉलजिकल हेल्प की जरूरत है। क्योंकि वे ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर से गुजर रहे हो सकते हैं। या फिर उन्हें इरिटेबल बॉल सिंड्रोम या डिल्यूजनल डिसऑर्डर की समस्या हो सकती है। अब यह जानें कि इनमें अंतर क्या है…
ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर यानी OCD के लक्षण
जो लोग ओसीडी से ग्रसित होते हैं उन्हें रीपिटेड थॉट्स आते हैं यानी कि उन्हें एक ही तरह के विचार बार-बार आते रहते हैं। ये विचार उन्हें परेशान करते हैं और उन विचारों के अनुसार ही वे एक काम को बार-बार करते रहते हैं। जैसे, कोई व्यक्ति बार-बार हाथ धोता रहता है। कई बार तो यह दिक्कत इतनी बढ़ जाती है कि व्यक्ति एक दिन में साबुन की एक-एक टिक्की तक खत्म कर देता है!
चलता रहता है डाउट्स का दौर
ओसीडी से ग्रसित लोगों को हर समय डाउट रहता है। ऐसे मरीज जब नहाने जाते हैं तो उन्हें लगता है कि उनके शरीर से गंदगी अभी साफ नहीं हुई है, अभी मैल लगा है, अभी स्मेल आ रही है और वे बार-बार नहाते रहते हैं। ऐसे में कुछ लोग तो पानी की टंकी का पूरा पानी तक खत्म कर देते हैं। जबकि कई लोग तब तक नहाना, हाथ धोना या साबुन रगड़ने का काम करते रहते हैं, जब तक कि वे ऐसा करते-करते थक ना जाएं या उन्हें यकीन ना हो जाए कि अब सब साफ हो चुका है।

नहाने का भी होता है क्रम

जानकर अजीब लग सकता है लेकिन ओसीडी से ग्रसित कुछ पेशंट्स में नहाने का भी क्रम देखने को मिलता है। ये लोग तय करके रखते हैं कि नहाते समय सबसे पहले मुंह धोना, फिर नेक धोनी है या हाथ धोने हैं फिर पैर धोने हैं और कब पूरी बॉडी पर साबुन लगाना है। अगर यह क्रम डूट जाता है तो ये फिर से इसे दोहराते हैं यानी एक बार फिर से शुरुआत से नहाते हैं। इस कारण इन्हें बाथरूम में बहुत वक्त लगता है।

चलती रहती है काउंटिंग

ओसीडी के कई मरीज बाथरूम में इस बात की काउंटिंग भी करते हैं कि कितनी बार साबुन लगाने पर वे पूरी तरह साफ हो जाएंगे… और कितने मग पानी से नहाने पर उनका साबुन पूरी तरह हट जाएगा। वे अपनी इस काउंटिंग को पूरा करने में लगे रहते हैं, फिर चाहे उन्हें और अधिक पानी की जरूरत ना हो। उनकी यह काउंटिंग सामान्य जरूरत से कहीं अधिक होती है।

बार-बार कपड़े धोना

कुछ लोगों को कपड़े धोने में बहुत वक्त लगता है। इनमें इनर्स भी शामिल हैं। ओसीडी के इन पेशंट्स को लगता है कि एक बार साबुन लगाने से कपड़े साफ नहीं हुए हैं और इन्हें अभी और साबुन लगाने की जरूरत है। यह दिक्कत महिला और पुरुष दोनों में पाई जाती है लेकिन पुरुषों की तुलना में यह महिलाओं में अधिक देखने को मिलती है।

पोटी धोना और प्रेशर लगाना

ओसीडी के कुछ मरीजों को ना सिर्फ नहाने में बल्कि पोटी जाने में भी बहुत वक्त लगता है। कुछ पेशंट तो पोटी जाने और नहाने में ही 5 से 6 घंटे लगा देते हैं…इन्हें बार-बार लगता है कि अभी इनका पेट साफ नहीं हुआ है और ये फिर प्रेशर लगाते हैं, क्लिनिंग के बाद खड़े होते हैं और फिर लगने लगता है कि अभी भी प्रेशर आ रहा है… यही क्रम चलता रहता है, जब तक कि इन्हें यकीन ना हो जाए कि अब सब ठीक है।

इरिटेबल बॉल सिंड्रोम

Irritable Bowel Syndrome एक ऐसी मानसिक दिक्कत है, जो ऐंग्जाइटी डिसऑर्डर से संबंधित होती है। इसमें भी पीड़ित व्यक्ति को बाथरूम में ज्यादा वक्त लगता है लेकिन यह सिंड्रोम ओसीडी से टेक्निकली अलग होता है। क्योंकि ओसीडी का पेशंट एक बार बाथरूम में जाता है तो कई घंटे बिताकर बाहर आता है जबकि इरिटेबल बॉल सिंड्रोम का पेशंट बार-बार बाथरूम में जाता है लेकिन नॉर्मल टाइमिंग में बाहर आ जाता है।

बार-बार पोटी आना

इरिटेबल बॉवल सिंड्रोम से ग्रसित मरीज को बार-बार यह अहसास होता है कि उसे पोटी का प्रेशर बन रहा है। जबकि वास्तव में ऐसा होता नही है और मरीज बार-बार बाथरूम के चक्कर लगाता रहता है। ऐसे में वह बहुत अधिक मानसिक दबाव महसूस करता है और उसकी कार्यक्षमता भी कम होती जाती है।

इरिटेबल बॉल सिंड्रोम और पेट की बीमारियां

इरिटेबल बॉल सिंड्रोम से जूझ रहे व्यक्ति को पेट में मरोड़ आना यानी क्रैंप्स, पेट दर्द, हर वक्त गैस पास होना या पेट फूलने जैसी समस्या लगना, डायरिया या कॉन्स्टिपेश या बहुत जल्दी-जल्दी दोनों बीमारियों की शिकायत भी हो सकती है।

डिलूज़नल डिसऑर्डर

Deluisonal Disorder वह मानसिक अवस्था होती है, जब किसी व्यक्ति को किसी गलत या झूठी बात पर पूरी तरह यकीन हो जाता है। मान लीजिए किसी व्यक्ति को चाय पीने से पहले लग जाए कि उसके हाथ में जो कप है, वह धुला हुा नहीं है… वह उस कप को तब तक धोता रहेगा, जब तक उसे यकीन ना हो जाए कि यह साफ हो गया है। अब आपको लगेगा कि ऐसा तो OCD में भी होता है फिर Deluisonal Disorder उससे अलग कैसे हुआ? तो यहां जानिए…
ओसीडी और डिलूजनल डिसऑर्डर में अंतर
ओसीडी में पेशंट को पता होता है कि वह जो कर रहा है वह गलत है, उसकी ऐक्टिविटीज उसका सिर्फ शक हैं… लेकिन फिर भी वह खुद को ऐसा करने से रोक नहीं पाता है। जबकि डिलूजनल डिसऑर्डर से ग्रसित व्यक्ति को अपने ऐक्ट गलत नहीं लगते। उसका गहरा यकीन होता है कि वो जो कर रहा है, वही सही है।

ट्रीटमेंट और सलूशन

ओसीडी, इरिटेबल बॉल सिंड्रोम हो या डिलूज़न सिंड्रोम, इन सभी का इलाज संभव है। हालांकि इसके लिए आपको सायकाइट्रिस्ट, साइकॉलजिस्ट से ट्रीटमेंट लेने की जरूरत है। साथ ही अपनी लाइफ से स्ट्रेस कम करना होगा, रहन-सहन और खान-पान को नियमित करना होगा। सोने और जागने तथा फिजिकल ऐक्टिविटीज पर फोकस करना होगा। आप पूरी तरह ठीक हो जाएंगे।

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