ADHD: कहीं बच्चे की बीमारी को उसकी शरारत समझ अनदेखा तो नहीं कर रहे आप?

ये बच्चे की शरारत नहीं, उसकी बीमारी के लक्षण हैं

हम सभी अपने बच्चे की परवरिश में अपना बेस्ट देना चाहते हैं। लेकिन कई बार स्थितियां ऐसी होती हैं कि हम अपने बच्चे की बीमारी को नहीं पहचान पाते हैं, खासतौर पर अगर बीमारी उसकी मेंटल हेल्थ से जुड़ी हो। ऐसी ही एक दिक्कत या मेडिकल लैंग्वेज में कहें तो डिसऑर्डर है ADHD (Attention Deficient Hyperactive Disorder)यह डिसऑर्डर बच्चे की लर्निंग और सोशल ग्रोथ में दिक्कतें खड़ी करता है और बच्चा अपनी योग्यता के अनुसार रिजल्ट नहीं दे पाता है। दिल्ली के जाने-माने सायकाइट्रिस्ट और उद्गम मेंटल हेल्थ केयर के फाउंडर डॉक्टर राजेश कुमार ने इस बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां दीं…

बच्चे शरारती होते ही हैं

हम सभी जानते हैं बच्चे शरारती होते ही हैं। लेकिन शरारती बच्चों और एडीएचडी डिसऑर्डर से पीड़ित बच्चों में फर्क पहचानना बहुत जरूरी है। इस बीमारी के लक्षण आमतौर पर बच्चे में 3 से 4 साल की उम्र में दिखने शुरू हो जाते हैं और 12 से 13 साल की उम्र तक बने रहते हैं और बच्चे की चीजें सीखने की क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। जबकि कुछ बच्चों में ये लक्षण 20-25 की उम्र तक भी बने रह सकते हैं।

बच्चे को होती है यह दिक्कत

इस डिसऑर्डर से पीड़ित बच्चों को अटेंशन और कंसंट्रेशन से जुड़ी समस्याएं होती हैं। इनके लिए किसी एक चीज पर ध्यान बनाए रखना या किसी बात को ध्यान से सुनना मुश्किल होता है। यही वजह होती है कि पैरंट्स और टीचर्स की बताई गई बातों को ये ध्यान से नहीं सुनते हैं या याद नहीं रख पाते हैं, क्योंकि इनका ब्रेन लगातार ऐक्टिव रहता है और इससे इनकी यादाश्त पर बुरा असर पड़ता है।

बार-बार वही गलतियां

इस डिसऑर्डर से पीड़ित बच्चे बार-बार वही गलतियां दोहराते हैं, जिन्हें लेकर उन्हें पहले भी कई बार डांट पड़ चुकी होती है और समझाया जा चुका होता है। ये बच्चे किसी भी काम को बमुश्किल पूरा कर पाते हैं, ऐसा इसलिए क्योंकि ये बहुत देर तक किसी काम में ध्यान नहीं लगा पाते और पहले काम को बीच में ही छोड़कर तुरंत दूसरे काम में लग जाते हैं और दिनभर उछलकूद मचाते हुए इसी तरह की ऐक्टिविटीज दोहराते रहते हैं।

लो फिर से खो दिया

ADHD डिसऑर्डर से पीड़ित बच्चे अक्सर अपना सामान खोते रहते हैं। जैसे, स्कूल बैग, बुक्स और लंच बॉक्स जैसी डेली यूज की चीजें संभालना भी उनके लिए मुश्किल रहता है और इन्हें याद नहीं रहता कि इन्होंने अपना सामान कहां रखा है?

इसे इतनी बेचैनी क्यों है?

ADHD से पीड़ित बच्चे हर समय बेचैन से रहते हैं, हाई एनर्जी फील करते हैं और एक साथ कई काम करने की कोशिश करते हैं।

बोलते-बोलते नहीं थकता…

जिन बच्चों को एडीएचडी की शिकायत होती है, वे बहुत बातें करते हैं और बहुत जल्दी गुस्सा भी हो जाते हैं। ये बहुत अधिक उछलकूद करते हैं, दूसरों के काम में दिक्कतें क्रिएट करते हैं या दो लोगों को आपस में बात भी नहीं करने देते हैं। ऐसे बच्चों को शांत होकर खेलने या आराम करने में दिक्कत होती है।

दिमाग सिर्फ शरारतों में चलता है

महत्वपूर्ण बात यह है कि नॉर्मल IQ होने के बावजूद ये अकैडमिक्स में उतना अच्छा परफॉर्म नहीं कर पाते, जितना अच्छा करने की कपैसिटी इनके अंदर होती है।

संभव है समाधान

अगर इस तरह के लक्षण आप बच्चे में देखते हैं तो इनके समाधान के लिए आप अपने नजदीकी पेडियाट्रिशियन या सायकाइट्रिस्ट से जरूर मिलें। इसका इलाज संभव है और बिहेवियर थेरपी के साथ-साथ कुछ एक्सपर्ट आपको कुछ जरूरी मेडिसिन्स भी बच्चे के लिए दे सकते हैं।

इंपॉर्टेंट है फीडबैक

बच्चे से जुड़ी इस समस्या को पहचानने में पैरंट्स के साथ ही स्कूल टीचर्स का बहुत बड़ा योगदान हो सकता है। बच्चे को लेकर टीचर्स का फीडबैक बहुत इंपॉर्टेंट होता है। ताकि उसकी ऐक्टिविटीज को सही तरीके से समझकर, उसे बेहतर तरीके से ट्रीट किया जा सके।

 
 
 
 

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